उम्मीद
उम्मीद
आंधिया यूँ तो बड़ी तेज़ हैं,
पर उम्मीदों का चिराग़ जलाएँ रखना है।।
कितने गहरें हैं, रातों के स्याह बादल,
ढ़लते-ढ़लते, ढल जाएंगे।
बस दिल में उम्मीदों को रोशन करना है।
बीतेंगे ये मौसम उदासियों के,
चुपचाप ये हलाहल पीते जाना है।
तकदीरें बदलतीं हैं, नेमतें मिलती हैं,
इसी ख्याल से आगे बढ़ते जाना है।
कश्तियाँ हैं बीच तूफानी लहरों के,
थाम पतवार विश्वास की, पार ले जाना है।
चट्टानों सी है मुश्किलें,
बुलंद हौसलों से, आगे बढ़ते जाना है।
आंधिया यूँ तो बड़ी तेज़ हैं,
पर उम्मीदों का चिराग़ जलाएँ रखना है।।
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