दोस्त
दोस्त
स्मृतियों के आलेख से आओ दोस्त,
चुरा लें 'वो' पलछिन, 'वो' यादें।
जा चुके बचपन की 'वो' प्यारी बातें।।
समुंदर किनारे कही हमारी अनकही बतकही,
और सपनों के जादुई संसार बसाना।
झिलमिलाते तारों को देख,
अपनी ही कहानी को सच बतलाना।
ना मानूँ जो रूठ जाऊँ, फिर तुम्हारा यूँ मनाना,
हमेशा संग-संग रहना, कभी हँसना-कभी रोना।
आओ दोस्त, चुरा लें 'वो' पलछिन 'वो' यादें,
जा चुके बचपन की 'वो' प्यारी बातें।।
धुंध कोहरे सा, खो गया साथ तुम्हारा,
जो कदम-दर-कदम साथ चलते थे, एक दूजे संग।
आओ फिर थाम कर एक दूजे को, ढूंढ़े मंज़िल की राहें।
खिलती धूप सा खिलखिलाए और
वृक्षओं में लिपटी लताओं सा,एक दूजे का संबल बन जायें।
आओ दोस्त दोहराएं हम 'वो' पलछिन 'वो' यादें,
जा चुके बचपन की 'वो' प्यारी बातें।।
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