जीवन और संघर्ष

जीवन और संघर्ष
ये दो मित्र, दोनों एक दूजे के बिन सून।
'समय' के एक पौध के दोनों नव प्रसून।।

संघर्ष बिन जीवन ऐसे, जैसे पुस्तक बिन ज्ञान।
जीवन बिन संघर्ष ऐसे, जैसे तपस्या बिन घ्यान।
संघर्ष सीचें मनोबल,त्याग और बलिदान,
संघर्ष के प्रयासों को जीवन करें गतिमान।

ये दो मित्र, दोनों एक दूजे के बिन सून।
'समय' के एक पौध के दोनों नव प्रसून।।

पथ पर काटें देख, जीवन जो घबराया,
चुन कर काटेंं संघर्ष ने,उसे अपने अंक समाया।
थक कर संघर्ष ने जो स्वयं पर विराम लगाया,
जीवन ने थाम उसे, आगे का प्रशस्त कर दिखलाया।

ये दो मित्र, दोनों एक दूजे के बिन सून।
'समय' के एक पौध के दोनों नव प्रसून।।

थाम हाथ संघर्ष का, जीवन लिखे यशोगाथा।
निर्बल होते जीवन को,संघर्ष दे नई परिभाषा।
कर्म करें अनुकरणीय, करें नव-निर्माण,
मान-प्रतिष्ठा से सुसज्जित, संघर्ष दे जीवन को सम्मान।
जीवन,संघर्ष को सम्मिलित कर,दे हौसलों को नई उड़ान।।

ये दो मित्र, दोनों एक दूजे के बिन सून।
'समय' के एक पौध के दोनों नव प्रसून।।

सिक्के के एक पहलू दोनों,
कर्म-भाग्य के निर्माता दोनों।
जीवन मेंं साथ लो संघर्ष का,यूं न घुटने टेकों।
संघर्षरत जीवन मेंं,सफलता को अर्जित कर देखो।।
बिन संघर्ष, जीवन हुआ कर्महीन।
बिन जीवन, संघर्ष हुआ अस्तित्वहीन।

ये दो मित्र, दोनों एक दूजे के बिन सून।
'समय' के एक पौध के दोनों नव प्रसून।।



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