मन

 रोशनियों में जगमगाता शहर,

सोने-चाँदी से सजे हुए घर, 

बेशकीमती लबादों से लदे हुए लोग,

पर अकेला सा मन।।

गहरी-गहरी है रात,

चुपचाप है चाँद, 

ठहरी-ठहरी है हवा,

पर तूफ़ान सा मन।।

कोलाहल के बीच, खड़ी यह ऊँची-ऊँची इमारतें,

और सुकून में सोता आदमी,

वीरान हैं सड़कें,

पर दौड़ता सा मन।।


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