खामोशी

  खामोशी

नवयौवना सी इठलाती हवाऐं।
हसँते फूल और गुनगुनाती कोयलेंं ,
कहतीं हैं ये क्या ।
आओ खामोशी से इन्हें सुनें ।।

मन की पीड़ा के कोलाहल का
और प्रियजन के आर्तनाद का,
गहरे भीतर अधंकार का
आओ खामोशी से हल सुझावेंं ।।

समय सही है विचार मंथन का
स्वयं का ईश्वर से परिचय का ,
ह्रदय में दीप जलाऐं ।
आओ खामोशी से ईश मिलन को पूर्ण बनाऐँ ।।

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